ग्रह-नक्षत्रों का हमारे शरीर पर कैसा असर? पद्मश्री डॉ. चूड़ामणि ने कानपुर में बताया सच, जानें

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Kanpur ki Local news : कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज पहुंची पद्मश्री डॉ. चूड़ामणि सरोज ने ज्योतिष विज्ञान का मानव जीवन से गहरा रिश्ता बताया. उन्होंने कहा कि ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का असर हमारे शरीर और सेहत पर भी पड़ता है. उन्होंने कहा कि जब किसी बच्चे का जन्म होता है तो अनुभवी ज्योतिष उसकी कुंडली बनाते हैं. ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति मानव जीवन को प्रभावित करती है, इसलिए इस पर गंभीरता से शोध होना चाहिए. डॉ. चूड़ामणि ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) पर भी अपनी बात रखी. आइये जानते हैं.
कानपुर. यूपी के कानपुर स्थित गणेश शंकर विद्यार्थी (जीएसवीएम) मेडिकल कॉलेज में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में पद्मश्री डॉ. चूड़ामणि सरोज ने ज्योतिष विज्ञान का मानव जीवन से गहरा संबंध बताया. उन्होंने कहा कि ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का असर हमारे शरीर और स्वास्थ्य पर भी पड़ता है. भारतीय परंपरा में ज्योतिष को लंबे समय से एक महत्त्वपूर्ण विज्ञान के रूप में देखा जाता रहा है. जब किसी बच्चे का जन्म होता है तो अनुभवी ज्योतिषविद उसकी कुंडली बनाते हैं. कुंडली से बच्चे के जीवन, स्वभाव और स्वास्थ्य से जुड़ी कई संभावनाओं के बारे में जानकारी दी जाती है. ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति मानव जीवन को प्रभावित करती है, इसलिए इस विषय पर गंभीरता से अध्ययन और शोध होना चाहिए.
एआई केवल सहायक
डॉ. चूड़ामणि सरोज ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआई पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि एआई एक ऐसी आधुनिक तकनीक है जिसमें जानकारियों का बड़ा भंडार मौजूद है. यह तकनीक कई क्षेत्रों में तेजी से उपयोग में लाई जा रही है और चिकित्सा क्षेत्र में भी इसका महत्त्व बढ़ रहा है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एआई केवल एक सहायक की भूमिका निभा सकता है. डॉक्टरों के लिए यह तकनीक मरीज से जुड़ी जानकारी जुटाने, रिपोर्ट का विश्लेषण करने और इलाज से जुड़े विकल्पों को समझने में मदद कर सकती है, लेकिन किसी मरीज की बीमारी को समझकर सही इलाज तय करना डॉक्टर का ही काम है.
नई संभावनाएं
डॉ. चूड़ामणि ने कहा कि आज भी कई गंभीर बीमारियों के इलाज को लेकर चिकित्सा क्षेत्र में काफी शोध की जरूरत है. अगर वैज्ञानिक और डॉक्टर इस दिशा में लगातार काम करें तो कई जटिल बीमारियों का इलाज आसान हो सकता है. चिकित्सा विज्ञान, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संतुलित उपयोग मानव समाज के लिए बहुत लाभदायक हो सकता है. जरूरत इस बात की है कि हम हर तकनीक का इस्तेमाल समझदारी और जिम्मेदारी के साथ करें. डॉ. चूड़ामणि ने कहा कि चाहे ज्योतिष हो या एआई, दोनों का उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना है. यदि इनका उपयोग सही दिशा में किया जाए तो स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में कई नई संभावनाएं सामने आ सकती हैं.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
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